सागर,
रानगिर स्थित मां हरसिद्धि धाम आस्था का ऐसा केंद्र है, जहां श्रद्धालु अटूट विश्वास के साथ अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा अवश्य पूर्ण होती है। यही वजह है कि यहां प्रतिदिन भक्तों का तांता लगा रहता है, जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान यह स्थल आस्था के महासागर में बदल जाता है।
नवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें सागर जिले के साथ-साथ पूरे मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तजन पूजा-अर्चना कर प्रसाद अर्पित करते हैं, अनुष्ठान करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मां के चरणों में शीश नवाते हैं। कई श्रद्धालु जहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं, वहीं अनेक लोग पूर्ण हुई मनोकामना के बाद धन्यवाद स्वरूप पुनः हाजिरी लगाने पहुंचते हैं।
पौराणिक मान्यता: सती के अंगों से बना सिद्ध क्षेत्र
वेद-पुराणों के अनुसार, जब राजा दक्ष द्वारा अपमानित होने पर माता सती ने योगबल से अपना शरीर त्याग दिया, तब भगवान शंकर ने उनके शरीर को लेकर तांडव किया। सृष्टि को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए। जहां-जहां ये अंग गिरे, वे स्थान सिद्ध पीठ कहलाए।
मान्यता है कि रानगिर में सती की ‘रान’ (जांघ) और ‘दांत’ के अंश गिरे, जिससे यह क्षेत्र अत्यंत पवित्र सिद्ध क्षेत्र माना जाता है। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि यहां की पहाड़ियों में रावण ने तपस्या की, जिससे इसका नाम पहले रावणगिरी और कालांतर में रानगिर हो गया। एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान राम के वनवास काल में उनके चरण यहां पड़े थे, इसलिए इसे रामगिर भी कहा गया।
इतिहास के पन्नों में रानगिर
इतिहास के अनुसार, वर्ष 1732 में रानगिर मराठा शासन की राजधानी रहा, जहां शासक पंडित गोविंद राव थे। वर्तमान मंदिर का स्थान उनका निवास परकोटा हुआ करता था। वर्ष 1760 में उनके निधन के बाद यह क्षेत्र खंडहर में बदल गया।
बाद में उसी खंडहर के बीच बने एक चबूतरे पर मां हरसिद्धि की प्रतिमा स्थापित की गई। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की आस्था और सहयोग से यह स्थल पुनर्जीवित हुआ और आज एक भव्य मंदिर के रूप में स्थापित है। वर्तमान मंदिर का निर्माण लगभग दो सौ वर्ष पूर्व माना जाता है।
तीन रूपों में देती हैं माता दर्शन
मां हरसिद्धि की महिमा निराली है। यहां मां दिन के तीन प्रहरों में तीन अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं—
🌅 प्रातःकाल – बाल रूप
☀️ दोपहर – युवा रूप
🌙 संध्या – वृद्धा रूप
यह अद्भुत परिवर्तन भक्तों के लिए विशेष आस्था का विषय है। श्रद्धालु इन रूपों के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मानते हैं। माना जाता है कि “हरसिद्धि” का अर्थ है—भगवान महादेव (हर) की कृपा से सिद्धि प्रदान करने वाली माता पार्वती।
विकास की ओर बढ़ता धाम
धाम के विकास को नई दिशा देने के लिए यहां एक आधुनिक झूला पुल का निर्माण किया जा रहा है, जो रहली और सुरखी विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ेगा। इस परियोजना से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि रानगिर एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में और अधिक विकसित होगा।
आस्था, इतिहास और चमत्कार का संगम है रानगिर की मां हरसिद्धि — जहां हर भक्त खाली हाथ नहीं लौटता, बल्कि विश्वास और संतोष की अनुभूति लेकर जाता है।


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