ब्यूरो रिपोर्ट अभिषेक नामदेव बमीठा

जांच से ग्राम पंचायत  शिवराजपुर में हुए भ्रष्टाचार से उठेगा पर्दा

शासन के नियमों को ताक पर रख कर पंचायत सचिव और पीसीओ ने किया राशि को गमन ओर उलन्धन

बमीठा:-राजनगर जनपद जनपद के शिवराजपुर ग्राम  पंचायत के दस्तावेज उठाकर देखा जाये तो, विकास के नाम पर लाखो रुपये सिर्फ कागजों में खर्च कर दिये गये, पंचायत और जनपद से लेकर जिला पंचायत तक के जिम्मेदार उस सचिव को ही काबिल मानते है, जो भ्रष्टाचार करने की दक्षता को पूर्ण करता हो, शायद यही कारण है बन्द व फर्जी  फर्माे को भुगतान तो किया ही, साथ ही मजे की बात तो यह है कि क्रय नियमों तक की खुलकर धज्जियां उड़ाई गयी।

नियम कायदों की उड़ाई धज्जियां//

प्रदेश सरकार प्रदेश के विकास कार्यों के लिए लाखों करोड़ों रुपए गरीब जनता के लिए पंचायतों को दे रही है, मगर क्या गरीबों को योजनाओं का लाभ जनपद पंचायत दे पा रही हैं, जनपद पंचायत राजनगर की ग्राम पंचायत शिवराजपुर  में नाडेप एवम शौचालय के लिए  प्रशांत ट्रेडर्स चंद्रनगर में 27000 हजार रुपये की राशि डाली  गयी एवम रूपराम पटेल निवासी चुरारन जो ग्राम पंचायतो में दलाली करता है  जिसके खाते में 2 लाख रुपये डाले गये सचिव राधेश्याम यादव व पीसीओ रामकिशन पटेल (नोडल प्रभारी ग्राम पंचायत शिवराजपुर) के द्वारा  दिनांक 18/01/2022  के दौरान लाखों रूपये के बिल लगाकर बिना कार्य के आहरण किया गया एवम 17/012022 को पुनः  सरपंचो को प्रभार दिए जाने का पत्र जारी हुआ था सचिव व pco के द्वारा अपने प्रभार का दुरुपयोग करते हुए राशि आहरण की गयी हैं जब मामला मीडिया के संज्ञान में आने पर मौके पर कार्य शुरू कराया गया हैं, चर्चाओं की अगर माने तो, इन बिलों की अगर जांच हुई तो, पंचायत के जिम्मेदार जहां एक ओर क्रय नियमों के उल्लंघन में फंसते नजर आयेंगे, वहीं दूसरी ओर फर्म संचालक द्वारा वाणिज्य कर विभाग के कायदों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
पंचायतों में हो रहे निर्माण कार्यों के लिए मटेरियल सप्लाई करने वाली फर्में जीएसटी चोरी करने के लिए बोगस बिल का उपयोग कर रही हैं। बिलों जीएसटी का कॉलम तो होता है, लेकिन उसमें भरा कुछ नहीं जा रहा। पूछने पर कहा जाता है कि राउंडफिगर बिल दिया है पंचायतों के जिम्मेदारों ने पूर्व में बिना पड़ताल किये पास कर दिया, वहीं वाणिज्य कर विभाग अब इस मामले में संज्ञान लेने की तैयारी में है, चर्चा है कि जनपद के जिम्मेदार इस मामले में सचिवों व pco  को बचाने की जुगत में लगे


कार्रवाई शिकायत पर होगी
जानकारों की माने तो जो बिल अधूरे होते हैं और जिनमें जीएसटी नंबर, टैक्स की राशि का उल्लेख नहीं होता है, वो फर्जी माने जाते हैं। वैध बिलों में सबकुछ दर्ज होता है। कितना माल बेचा, कितना टैक्स कटा आदि। अगर फर्में ऐसे बिल उपयोग कर रही हैं तो, जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें जितनी राशि टैक्स की बनती वह पूरी उनसे वसूले जाने का प्रावधान है। वहीं इस मामले में वाणिज्य कर विभाग के निरीक्षक सर द्वारा बताया गया कि उक्त मामले को विभाग ने संज्ञान में लिया जाएगा! जल्द ही फर्म संचालक को नोटिस जारी किया जायेगा, लेकिन मजे की बात तो यह है कि पूरे मामले में राजनगर  जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से उनका पक्ष जानने की कोशिश की जाती है तो, वह इस मामले में कुछ भी कहने से बचते नजर आते हैं।

इनका कहना
रामकिशुन पटेल पीसीओ):-मेरे द्वारा पैसे निकाले गए है आपको जो करना हो कर लो

राधेलाल यादव(सचिव):-पैसे निकाले गए है काम चल रहा हैं


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