सागर,।
नेशनल हाईवे-44 फोरलेन पर बांदरी के निकट स्थित मेहर गांव में धसान-कढ़ान नदी के पावन तट पर मां हिंगलाज देवी का अति प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लगभग 400 वर्ष पुराने इस मंदिर में वर्षभर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के दौरान यहां विशेष धार्मिक माहौल बन जाता है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसके समीप एक रहस्यमयी गुफा स्थित है, जिसका गुप्त मार्ग गढ़पहरा की अनगढ़ देवी तक जाता है। यह रहस्य आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

पांडवों से जुड़ी प्राचीन मान्यता
मंदिर से जुड़ी किवदंती के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आए थे। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन शिवलिंग की स्थापना भी उन्हीं के द्वारा की गई मानी जाती है। यहां मां हिंगलाज देवी के साथ भगवान शिव, बारह ज्योतिर्लिंग, काल भैरव और रामदरबार के दर्शन भी श्रद्धालुओं को एक ही स्थान पर प्राप्त होते हैं। परंपरा के अनुसार, भक्त पहले काल भैरव के दर्शन करते हैं, उसके बाद मां के दरबार में पहुंचते हैं।
यह भी कहा जाता है कि वर्षा ऋतु में एक गुप्त जलधारा के माध्यम से धसान-कढ़ान नदी स्वयं गुप्तेश्वर महादेव का अभिषेक करने आती है, जो इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ा देता है।

नवरात्र में विशेष श्रृंगार और आस्था
नवरात्र के दौरान मंदिर में प्रतिदिन मां हिंगलाज देवी का आकर्षक और नयनाभिराम श्रृंगार किया जाता है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए लाल कपड़े में नारियल बांधकर चढ़ाते हैं, वहीं कष्टों से मुक्ति के लिए मां को नींबू की माला अर्पित की जाती है।
महिलाएं यहां सुहाग की सामग्री अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। मंदिर में नवरात्र के समय विशेष चहल-पहल रहती है और भक्तों को यहां आकर मानसिक शांति का अनुभव होता है।
आध्यात्मिक वातावरण और इतिहास
मंदिर परिसर में विशाल पीपल, बरगद और बेलपत्र के पेड़ इसकी पवित्रता को और बढ़ाते हैं। यहां कई साधु-संतों की समाधियां भी बनी हुई हैं, जो इस स्थान की आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाती हैं।
स्थानीय पुजारियों के अनुसार, एक समय ऐसा भी था जब मंदिर के आसपास का क्षेत्र सुनसान और भयभीत करने वाला था, क्योंकि यहां जंगली जानवर पानी पीने आते थे। लेकिन समय के साथ आबादी बढ़ी और श्रद्धालुओं की आस्था ने इस स्थान को एक प्रमुख धार्मिक केंद्र बना दिया।
आज मां हिंगलाज देवी का यह मंदिर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

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