स्प्रिंकलर पाइप अपनाकर पानी की बचत, लागत घटी और गेहूं-चना उत्पादन में हुआ इजाफा
सागर,
सागर जिले के बंडा विकासखंड के ग्राम पंचायत धबौली के प्रगतिशील किसान जीवन सिंह ने सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती में सफलता की नई मिसाल कायम की है। पहले वे पारंपरिक सिंचाई पद्धति से खेती करते थे, जिससे पानी की अधिक खपत होती थी और लागत भी बढ़ जाती थी। पानी की कमी के कारण फसल उत्पादन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल पाता था।
स्थिति को बदलने के लिए किसान जीवन सिंह ने अपने खेत में स्प्रिंकलर पाइप (लचीली आधुनिक सिंचाई पाइप) का उपयोग शुरू किया। इस तकनीक से खेतों में पानी का समान वितरण होने लगा, रिसाव कम हुआ और सिंचाई में लगने वाला समय भी काफी घट गया। पहले जहां एक एकड़ खेत की सिंचाई में कई घंटे लगते थे, अब वही काम कम समय में पूरा होने लगा।
जीवन सिंह बताते हैं कि नई तकनीक अपनाने से पानी की बचत हुई, डीजल और बिजली का खर्च कम हुआ तथा फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आया। इसके परिणामस्वरूप गेहूं और चने की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई। उनकी सफलता को देखकर आसपास के कई किसान भी आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
माइक्रो इरिगेशन से किसानों को लाभ
कृषि विभाग के अनुसार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (माइक्रो इरिगेशन) के तहत किसान स्प्रिंकलर, मिनी स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम खरीदकर अपने खेतों में लगा रहे हैं। इन तकनीकों से कम पानी में अधिक क्षेत्र की सिंचाई संभव हो रही है। ड्रिप सिंचाई के माध्यम से पानी के साथ तरल उर्वरक भी फसल तक पहुंचाए जा सकते हैं, जिससे उत्पादन बेहतर होता है और खेतों में खरपतवार की समस्या भी कम होती है।
योजना का लाभ ऐसे लें किसान
किसान भाई ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर पंजीयन कर इस योजना का लाभ ले सकते हैं। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, खाता-खसरा नकल, बैंक पासबुक, सिंचाई स्रोत का प्रमाण और अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों के लिए जाति प्रमाण पत्र आवश्यक होगा।
किसान जीवन सिंह की कहानी यह साबित करती है कि यदि किसान नई तकनीक अपनाएं और सकारात्मक सोच के साथ खेती करें, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन और आर्थिक मजबूती हासिल की जा सकती है। 

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