सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में आयोजित जनसुनवाई के दौरान मंगलवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और जेल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक पीड़ित महिला ने अचानक अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की तत्परता से बड़ी अनहोनी टल गई।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला तस्लीम अली (पुत्री स्वर्गीय हजरत अली) ने आरोप लगाया कि उसका पुत्र रिहान नासिर उर्फ शहनवाज खान पिछले पांच वर्षों से कथित रूप से झूठे मामले में सागर की केंद्रीय जेल में बंद है। महिला का कहना है कि उसके बेटे का मामला विशेष न्यायालय (हरिजन कोर्ट) सागर में विचाराधीन था, जिसका अंतिम आदेश 15 जनवरी 2025 को पारित हो चुका है, इसके बावजूद उसे लगातार प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जेल में तैनात कुछ कर्मचारी उससे लगातार पैसों की मांग कर रहे हैं। आरोप है कि पैसे नहीं देने पर उसके बेटे को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, साथ ही उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी जा रही है। पीड़िता का यह भी कहना है कि उसे अपने बेटे से मिलने तक नहीं दिया जा रहा, जिससे वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी है।
अपने ज्ञापन में महिला ने हरिशंकर पटेल नामक जेल कर्मी पर भी आरोप लगाए हैं, जो कथित रूप से जेल के अंदर अवैध वसूली और गैंग संचालन में संलिप्त है। महिला का दावा है कि उसके पास कॉल रिकॉर्डिंग और वीडियो जैसे पुख्ता सबूत भी मौजूद हैं, जिन्हें वह जांच एजेंसियों को सौंपने को तैयार है।
इन आरोपों और लगातार हो रही प्रताड़ना से परेशान होकर महिला ने जनसुनवाई के दौरान आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश की। हालांकि, मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और महिला को शांत कर उसकी पूरी शिकायत सुनी।
प्रशासन की ओर से महिला को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है और यह दर्शाती है कि न्याय की तलाश में पीड़ित किस हद तक जाने को मजबूर हो रहे हैं।

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