सागर | जिले के ग्राम गुलाबवा से खेती-किसानी को लेकर एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहाँ के दो प्रगतिशील किसानों, श्री उमेश पटेल और श्री अवधेश अहिरवार ने यह साबित कर दिया है कि यदि संकल्प शक्ति हो, तो कम लागत में भी खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकता है। इन दोनों किसानों ने रासायनिक खाद और घातक कीटनाशकों को पूरी तरह त्याग कर जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाया है।
जीवामृत और नीमास्त्र से महक उठी फसलें
उमेश और अवधेश अब अपनी फसलों की देखभाल के लिए बाजार पर निर्भर नहीं हैं। वे स्वयं घर पर ही जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और बीजामृत जैसे प्राकृतिक घोल तैयार करते हैं। गोबर खाद और जैविक पोषक तत्वों के उपयोग से न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है, बल्कि फसलों की गुणवत्ता में भी भारी सुधार हुआ है।
चिया और अश्वगंधा: पारंपरिक खेती के साथ नया प्रयोग
इन किसानों ने केवल गेहूं-चना तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि औषधीय खेती की ओर भी कदम बढ़ाए हैं। वर्तमान में ये चिया सीड्स और अश्वगंधा जैसी महंगी फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इस विविधता ने उनकी आय के नए स्रोत खोल दिए हैं। सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इनकी सफलता देख गाँव के युवा भी अब कृषि में रुचि लेने लगे हैं।
जैविक हाट बाजार: उपज के मिल रहे बेहतर दाम
किसानों द्वारा उत्पादित शुद्ध सब्जियां और फल प्रत्येक रविवार को स्थानीय जैविक हाट बाजार में पहुँच रहे हैं। उपभोक्ताओं के बीच इन उत्पादों की भारी मांग है, जिससे किसानों को अपनी मेहनत का वाजिब और अच्छा दाम मिल रहा है।
किसानों का संदेश: "प्राकृतिक खेती न केवल हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए वरदान है, बल्कि सही विपणन (Marketing) मिले तो यह आर्थिक रूप से सबसे लाभदायक सौदा है।"
आज उमेश पटेल और अवधेश अहिरवार पूरे क्षेत्र के लिए 'रोल मॉडल' बन चुके हैं। उनकी यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में एक सकारात्मक बदलाव और नई सोच का प्रतीक है।


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