नियमों को ताक पर रखकर वसूला जा रहा मनमाना जुर्माना; गौरनगर के निवासी से नियमों के विरुद्ध की गई कार्रवाई

सागर |

शहर को स्वच्छ बनाने के संकल्प के साथ सड़कों पर उतरी नगर निगम की टीम अब विवादों के घेरे में है। स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन आने की होड़ में निगम प्रशासन नियमों को ताक पर रखकर आम जनता की जेब ढीली करने में जुटा है। ताजा मामला वार्ड क्रमांक 1, गौरनगर का है, जहाँ एक नागरिक से नियमों के विरुद्ध जाकर दोगुना जुर्माना वसूलने का मामला सामने आया है।

क्या है पूरा मामला?

​जानकारी के अनुसार, गौरनगर निवासी दीपक पटेल (पिता कामता प्रसाद पटेल) का 13 मार्च 2026 को नगर निगम की टीम ने चालान काटा। चालान में कारण 'आम रोड पर कचरा डालना' बताया गया और मौके पर ही 500 रुपये का जुर्माना वसूल किया गया। बुक नंबर 530 की रसीद क्रमांक 10 थमाकर इतिश्री कर ली गई, लेकिन जब इस जुर्माने की तुलना निगम की आधिकारिक रेट लिस्ट से की गई, तो विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

लिस्ट में कहीं नहीं '500' का जिक्र

​नगर निगम द्वारा जारी 'विशेष सफाई शुल्क दरों' की आधिकारिक सूची के अनुसार, आवासीय क्षेत्र में गंदगी फैलाने पर जुर्माने की राशि 250 रुपये निर्धारित है। वहीं, दुकानों या व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए यह राशि 1000 रुपये है। पूरी लिस्ट में कहीं भी 500 रुपये के जुर्माने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर किस नियम के तहत पीड़ित से 500 रुपये वसूले गए?

जनता में आक्रोश: 'अवैध वसूली' या 'लापरवाही'?

​इस विसंगति के सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि निगम के कर्मचारी अपनी मर्जी से मौके पर जुर्माना तय कर रहे हैं। यदि आवासीय क्षेत्र का नियम 250 रुपये का है, तो बिना किसी आदेश के दोगुनी राशि लेना सीधे तौर पर अवैध वसूली की श्रेणी में आता है।

"नगर निगम की मंशा शहर को साफ रखने की है या जुर्माना वसूल कर खजाना भरने की? जब नियम स्पष्ट हैं, तो कर्मचारी मनमानी क्यों कर रहे हैं? इस अतिरिक्त वसूली का हिसाब कौन देगा?"

एक जागरूक नागरिक


इन सवालों के घेरे में निगम प्रशासन:

  • ​आधिकारिक रेट लिस्ट से हटकर 500 रुपये का आंकड़ा कहाँ से आया?
  • ​क्या निगम के उच्च अधिकारियों को इस 'ओवर-चार्जिंग' की जानकारी है?
  • ​क्या यह केवल एक मामला है या शहर भर में इसी तरह वसूली की जा रही है?

​अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद नगर निगम प्रशासन अपनी गलती सुधारता है या फिर स्वच्छता के नाम पर इसी तरह जनता की जेब पर कैंची चलती रहेगी।

Post a Comment

और नया पुराने
RNVLive NEWS WEB SERVICES