सागर,। जिले के शाहगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पापेट के प्रगतिशील किसान भगवान दास पिता ताहार पटेल प्राकृतिक खेती अपनाकर कम लागत में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं और आर्थिक रूप से मजबूत बन रहे हैं। उनकी सफलता से आसपास के किसान भी प्रेरित होकर प्राकृतिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
भगवान दास अपनी लगभग 2.5 हेक्टेयर भूमि में प्राकृतिक पद्धति से खेती करते हैं। वे अपने खेतों में बैंगन, टमाटर, अदरक, हल्दी, गेहूं, चना, मसूर के साथ ही पपीता और अमरूद का उत्पादन कर रहे हैं। खास बात यह है कि वे अपनी खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं करते।
किसान भगवान दास बताते हैं कि वे पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए जैविक खाद, वर्मी कंपोस्ट, गोबर की खाद, जीवामृत और बायोफर्टिलाइजर का उपयोग करते हैं, जबकि कीट नियंत्रण के लिए नीम तेल और दस पत्ती अर्क का प्रयोग करते हैं। उनका उद्देश्य कम लागत में स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त करना है। इसी कारण उनकी खेती में लागत कम और मुनाफा अधिक हो रहा है।
प्राकृतिक खेती से सुधर रहा मृदा स्वास्थ्य
भगवान दास के अनुसार गोबर और गोमूत्र के उपयोग से भूमि को पोषण मिलता है, जिससे मिट्टी में सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और मृदा की उर्वरता बढ़ती है। स्वस्थ मिट्टी से प्राप्त अनाज और सब्जियां अधिक पौष्टिक और सुरक्षित होती हैं। प्राकृतिक खेती के कारण जहर मुक्त खाद्यान्न और सब्जियों का उत्पादन भी संभव हो रहा है।
क्या है प्राकृतिक खेती
प्राकृतिक खेती एक रसायन-मुक्त पारंपरिक कृषि पद्धति है, जो कृषि पारिस्थितिकी पर आधारित होती है। इसमें फसलों, वृक्षों और पशुधन को जैव विविधता के साथ जोड़ा जाता है। इस पद्धति में गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत, बीजामृत और पंचगव्य जैसे प्राकृतिक इनपुट का उपयोग किया जाता है, जिससे मिट्टी के सूक्ष्म जीव सक्रिय रहते हैं और भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है।
प्राकृतिक खेती में मल्चिंग (पलवार) जैसी तकनीकों का उपयोग कर मिट्टी की नमी बनाए रखी जाती है, जिससे जल संरक्षण में भी मदद मिलती है और फसलें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सुरक्षित रहती हैं। इससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है और किसानों की आय में वृद्धि होती है।
सहकारिता से बढ़ेगी समृद्धि
सरकार द्वारा “सहकारिता से समृद्धि” के तहत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को संगठित किया जा रहा है और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सशक्त बनाया जा रहा है, ताकि किसानों को प्राकृतिक खाद-बीज सस्ती दरों पर मिल सकें और उनके उत्पादों को उचित बाजार और बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके।
प्रदेश में जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए वर्ष 2025-26 में 43,350 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक प्रमाणीकरण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसमें किसानों को 5,000 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष अनुदान दिया जा रहा है। वहीं नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत 1,513 क्लस्टरों में 1,89,125 एकड़ क्षेत्र में किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसमें प्रत्येक किसान को 4,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष अनुदान का प्रावधान है।
इसके अलावा योजना के तहत 3,026 कृषि सखियों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया है और प्रत्येक कृषि सखी को 5,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय देने की व्यवस्था की गई है। प्राकृतिक खेती को ग्रामीण समृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है।

Post a Comment

और नया पुराने
RNVLive NEWS WEB SERVICES