विश्व महिला दिवस पर विशेष
कहानी सच्ची है
मन में विश्वास, संकल्प और इच्छाशक्ति हो तो कोई काम असंभव नहीं
बेटियों को ऐसा पढ़ाया कि छू लिया आसमान
सागर
मन में विश्वास, संकल्प और इच्छाशक्ति हो तो कोई काम असंभव नहीं होता है। बुंदेलखंड में बदलाव की बयार चल रही है। यहां की बेटियां देश और दुनिया में इलाके का मान बढ़ा रही हैं। कभी पिछड़ेपन और बेटियों को लेकर पुरानी सोच का माना जाने वाला बुंदेलखंड बेटियों के कारण मशहूर हो रहा है। ऐसी ही बुंदेलखंड की एक बेटी शिल्पी सोनी है, जिन्होंने न सिर्फ बुंदेलखंड बल्कि देश और दुनिया में स्पेस साइंटिस्ट के तौर पर अपनी पहचान बनाई है। चार बहनों में सबसे बड़ी शिल्पी सोनी ISRO के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद में सीनियर साइंटिस्ट पद पर हैं। शिल्पी सोनी चंद्रयान-1 से लेकर चंद्रयान-3 और रिमोट सेंसिंग मिशन जैसे अहम मिशनों में काम कर चुकी हैं। हिंदी मीडियम स्कूल से हायर सेकेंडरी और सागर में ही इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने जो सफलता हासिल की है, आज बुंदेलखंड की बेटियां उन्हें आदर्श के तौर पर देख रही हैं।
शिल्पी सोनी की कहानी उनके माता-पिता की जुबानी सुनी, जिसमें सामने आया कि शिल्पी सोनी की मां जल्दी शादी के कारण 8वीं तक पढ़ाई कर पाईं, लेकिन पढ़ाई के महत्व को ऐसा समझा कि उनकी बड़ी बेटी शिल्पी सोनी देश और दुनिया छोड़कर अंतरिक्ष तक नाम रोशन कर रही हैं। उनकी छोटी तीनों बहनें भी विदेश में बड़े-बड़े पैकेज पर जॉब कर रही हैं।
कौन हैं शिल्पी सोनी
****शिल्पी सोनी की बात करें तो शिल्पी सोनी फिलहाल ISRO के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद में सीनियर साइंटिस्ट पद पर पदस्थ हैं। इसरो में 2001 से कार्यरत शिल्पी का पहले DRDO बैंगलोर में चयन हुआ था। इनकी शुरुआती पढ़ाई सागर के हिंदी मीडियम स्कूल विश्वभारती में हुई। हमेशा अव्वल रहने वाली शिल्पी ने पीईटी की परीक्षा पास कर सागर के इंदिरा गांधी शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया और वहां भी 8 सेमेस्टर में टॉप करने के बाद पहली ही बार में DRDO और फिर ISRO में चयन हुआ। खास बात यह है कि उनके पति प्रदीप सोनी भी ISRO के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद में सीनियर साइंटिस्ट पद पर पदस्थ हैं। दोनों ने साथ ही इंजीनियरिंग की और दोनों का साथ ही DRDO और फिर ISRO में सिलेक्शन हुआ। फिर ISRO जॉइन करने के पहले दोनों की शादी भी हुई। जहां तक शिल्पी की बात करें, तो शिल्पी चंद्रयान-1 से लेकर चंद्रयान-3 तक हर मिशन में कैमरा सिस्टम एवं पेलोड इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डेवलपमेंट के लिए बतौर प्रोजेक्ट मैनेजर काम कर चुकी हैं।
सिर्फ 8वीं तक पढ़ पाईं शिल्पी की मां, लेकिन समझा पढ़ाई का महत्व
शिल्पी सोनी की मां सुधा रूसिया की बात करें तो उनकी शादी महज 15–16 साल की उम्र में हो गई थी। तब वह 8वीं कक्षा में पढ़ रही थीं और स्कूल में हमेशा अव्वल नंबर लाती थीं। शिल्पी की मां सुधा रूसिया बताती हैं कि जब मैं पढ़ रही थी, तब घर में ऐसा माहौल था कि 3 बहनें बड़ी और दो भाई छोटे थे। लोग पिताजी से बहनों को लेकर कुछ न कुछ बोलते रहते थे, तो उन्होंने सबकी शादियां जल्दी कर दीं। मेरी चार बेटियां हैं, हमें जो माहौल मिला, बेटियों के लिए वैसा माहौल नहीं आने दिया। उन्हें पढ़ाई में फ्री हैंड दिया कि जो अच्छा लगे, पढ़ाई करो। पढ़ाई में चारों बेटियां बहुत अच्छी थीं, सबने काफी मेहनत की। शिल्पी का तो ऐसा था कि वह हमेशा टॉपर रही। मैं भी अपने स्कूल में टॉप करती थी। शिल्पी पढ़ाई में ऐसी थी कि चाहे टीवी चल रही हो या हम लोग बातें कर रहे हों, लेकिन वह किताबें लेकर पढ़ने बैठती, तो उसका पूरा ध्यान पढ़ाई पर रहता था। हमारा सोचना ऐसा नहीं था। हम खुद भी ऐसे रहे कि हमेशा कुछ न कुछ करना है। रोटी, चौका और बर्तन तो सब करते हैं, इसके अलावा भी कुछ करना है। हमने बच्चों को ऐसी शिक्षा दी कि घर के कामकाज के साथ-साथ दूसरे काम भी अच्छे से करें। समाज से जुड़े काम हों या किसी दूसरे क्षेत्र से जुड़े काम हों, हर काम अच्छे से करें। सब बेटियों ने अपना-अपना पसंद का क्षेत्र चुना और सब बड़े-बड़े पद पर जॉब कर रही हैं।
स्कूल से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज तक हमेशा टॉपर
****शिल्पी के पिता ओमप्रकाश रूसिया बताते हैं कि शिल्पी चारों बेटियों में सबसे बड़ी हैं। शिल्पी ने विश्वभारती स्कूल में पढ़ाई की। वहां से 12वीं की पढ़ाई के बाद पीईटी का एग्जाम दिया, तो पहली बार में ही सिलेक्शन हो गया। हम लोग इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन ब्रांच चाहते थे। हमें सागर की आईजीईसी (इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज) में एडमिशन मिला। उस समय कई लोगों ने बाहर भेजने की सलाह दी, लेकिन मैंने सागर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और यहां की पढ़ाई के स्तर को जानता था। मनमाफिक ब्रांच मिलने के बाद शिल्पी ने सभी 8 सेमेस्टर में टॉप किया। शिल्पी के बैच में 80 लड़के और सिर्फ 4 लड़कियां थीं। ईश्वर की कृपा से शिल्पी ने पढ़ाई में बहुत ध्यान दिया। कभी पढ़ाई में शिल्पी फिसड्डी नहीं रही, हमेशा सबसे आगे रही। इंजीनियरिंग कॉलेज में भी उसने अपनी ब्रांच में टॉप किया। उनके जीवनसाथी भी इसरो में वैज्ञानिक हैं, वह भी समान पद पर हैं और साथ में ही पोस्टिंग है। वह दोनों साथ में पढ़े हैं। शिल्पी टॉप करती थीं, वह सेकंड टॉपर रहते थे। शिल्पी ने जो मेहनत की, उसका परिणाम मिला है। शिल्पी से हम लोग यही कहते हैं कि बेटा अभी 15–16 साल की नौकरी है, नई पीढ़ी के लिए ऐसा कुछ कर दिखाओ कि उन्हें प्रेरणा मिले कि लड़कियां क्या नहीं कर सकती हैं। हमारी 4 बेटियां हैं। दूसरी बेटी कनाडा में माइक्रोबायोलॉजिस्ट है और कैंसर पर रिसर्च कर रही है। तीसरी बेटी एक्सेंचर कंपनी में मलेशिया में है और चौथी बेटी इंफोसिस में कनाडा में काम कर रही है। बच्चे कुछ अच्छा करते हैं और किसी के भी बच्चे कुछ अच्छा करते हैं, तो हमें बहुत खुशी होती है।
भारत की बेटियों को शिल्पी का संदेश
शिल्पी सोनी ने बताया कि मम्मी-पापा ने हम बहनों की प्रारंभिक पढ़ाई के समय से सीमित संसाधनों के बावजूद कभी कोई कमी महसूस नहीं होने दी और हम सभी ने उनके संरक्षण एवं प्रोत्साहन को कभी कमतर नहीं आंका। मैं अपने गुरुजनों की हमेशा आभारी रहूंगी, जिनकी कृपा से हम इतनी ऊंचाई तक पहुंच पाए। मैं आज के विद्यार्थियों से, जो कल के भारत का भविष्य हैं, कहना चाहूंगी कि वे जो भी विषय पढ़ रहे हों, उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ हासिल करें, ताकि आप अपने देश और दुनिया को अपना बेहतरीन प्रदर्शन समर्पित कर सकें। यही इस मनुष्य जीवन का सार है। फिर आपको जो सम्मान प्राप्त होगा, वह पल आपके जीवन का अविस्मरणीय अवसर होगा।


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